पेट चीरकर खुद कराया प्रसव: फखरपुर की महिला ने दिखाई असाधारण हिम्मत, हालत गंभीर, नवजात सुरक्षित
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Bahraich News
प्रसव पीड़ा में महिला ने खुद कराया प्रसव.
हालत गंभीर, लखनऊ ट्रामा सेंटर में इलाज जारी.
नवजात बच्ची सुरक्षित, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल.
Bahraich / जिले के फखरपुर क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और संवेदनशील घटना सामने आई है, जहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला ने अकेलेपन और असहाय स्थिति में खुद ही चाकू से अपना पेट चीरकर नवजात को बाहर निकाल लिया। घटना के बाद महिला की हालत गंभीर हो गई, जबकि नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है। महिला को प्राथमिक उपचार के बाद पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फखरपुर, फिर मेडिकल कॉलेज बहराइच और अंततः गंभीर स्थिति को देखते हुए लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार नंदवल गांव निवासी 34 वर्षीय ननकई गर्भवती थी और उसके पहले से पांच बच्चे हैं। करीब छह महीने पहले उसके पति की मौत हो चुकी है, जिससे वह मानसिक और सामाजिक रूप से भी कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही थी। गुरुवार दोपहर अचानक उसे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था और दर्द लगातार असहनीय होता जा रहा था। मदद के लिए कोई सहारा न मिलने पर महिला ने अत्यधिक पीड़ा और घबराहट में यह खतरनाक कदम उठा लिया। उसने घर में मौजूद चाकू से अपने पेट को चीर दिया और किसी तरह नवजात बच्ची को बाहर निकाल लिया।
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास रहने वाली महिलाएं मौके पर पहुंचीं तो घर के अंदर का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गईं। महिला खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी और उसके पास नवजात बच्ची रो रही थी। तत्काल इसकी सूचना क्षेत्र की एएनएम और एंबुलेंस सेवा को दी गई। एंबुलेंस की मदद से महिला को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फखरपुर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया।
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी विभाग के चिकित्सकों ने महिला का इलाज शुरू किया। डॉक्टर शिवम मिश्रा और डॉक्टर राजेश सोनकर की टीम ने महिला की हालत को स्थिर करने का प्रयास किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर आंतरिक चोटों के कारण स्थिति चिंताजनक बनी रही। मेडिकल कॉलेज के सर्जन एफआर मलिक ने बताया कि महिला की हालत अत्यंत गंभीर है और उसे बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के ट्रामा सेंटर भेजा गया है। वहीं नवजात बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है और उसे महिला विंग में भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
घटना की सूचना मिलने पर महिला की मां मुन्नी देवी भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी घर में अकेली थी और प्रसव पीड़ा के दौरान उसे कोई मदद नहीं मिल सकी। पति की मौत के बाद वह पहले से ही काफी परेशान और असहाय थी। ग्रामीणों के अनुसार महिला बेहद गरीब परिवार से है और पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और लोग महिला की हिम्मत और मजबूरी दोनों पर चर्चा कर रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की घटना बेहद दुर्लभ और खतरनाक होती है, जिसमें महिला की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि प्रसव के समय प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता जरूर लें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य केंद्र या एंबुलेंस सेवा से संपर्क करें। फिलहाल महिला का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि नवजात बच्ची स्वस्थ है और उसकी देखभाल अस्पताल में की जा रही है।